शरारत है सूझी

शरारत है सूझी

चढ़ी है जवानी ।
शरारत है सूझी ॥
मुझे देख कर वह तो ॥
हंसने लगा है ॥
हमें लग रहा है ॥
हुआ है दीवाना ॥
दिल का बाजा भी ॥
बजने लगा है ॥
मधुर मीठी बाते ॥
हमको सुनाता ॥
मुहब्बत के फंदे में ॥
शायद फसाता ॥
घर का हमारे ॥
चक्कर लगाता ॥
कलियो पे आके ॥
खूब मंडराता ॥
आँखों में सपना जो ॥
सजने लगा है ॥
हमें लग रहा है ॥
हुआ है दीवाना ॥
दिल का बाजा भी ॥
बजने लगा है ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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