आगे की सोच

एक बुजुर्ग कहीं जा रहे थे । रास्ते में उन्हें एक व्यक्ति मिल गया। वह अपना दुखड़ा सुनाने लगा । अपने साथ गुजरी हुई बातो को लेकर वह दुखी था । बुजुर्ग ने समझाया कि जो हुआ , आगे की सोचो । लेकिन उस पर कोई प्रभाव पड़ता नहीं दिखा । चलते -चलते एक तालाब आ गया जिसके पार दोनों को पहुंचना था । उसे पार करने के लिए लाइन से बड़े -बड़े पत्थर रखे हुए थे। बुजुर्ग ने कहा – तुम ऐसा करो, पहले में तालाब पार कर लेता हुँ इसके बाद तुम इन पत्थरों से होकर तालाब पार करो लेकिन आगे वालो पत्थर पर जाने के बाद पीछे वाला पत्थर भी उठा लेना ।वह व्यक्ति बोला- दादाजी , ऐसा कैसे हो सकता है ऐसा करने से तो मैं तालाब को पार नहीं कर पाऊँगा। तब बुजुर्ग बोला तो फिर अपने अतीत का बोझ लेकर क्यों घूमते हों ।
कथा मर्म: – गुजरी हुई अप्रिय बातो को भूल जाना ही बेहतर हैं तभी हम जीवन में आगे बढ़ सकते है।

– अरविन्द कुमार
सौजन्य – भावांजलि वार्षिक पत्रिका

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