चमन बाग़ में आयेगे

हर ऋतुओ में भवरे बन कर ॥
चमन बाग़ में आयेगे ॥
हर बार कलियो पर तेरे ॥
भन भन कर मंडराये गे ॥
हर बार तुम्हारा रसपान करेंगे ॥
हम भवरे बन कर के आयेगे ॥
सूर्य अस्त बाँहो में छिपाना ॥
हम रात में रास रचाएंगे ॥
हम भी तुमको पूर्व जन्म की ॥
बीती कथा सुनायेगे ॥
हर बार तुम्हारा रसपान करेंगे ॥
हम भवरे बन कर के आयेगे ॥
हम भवरे बन कर के आयेगे ॥
चूस लिया हूँ रस को तुम्हारे ॥
तेरा दीवाना बन बैठा हूँ ॥
इतनी खुशिया तूने दे दी ॥
तुम्हे पता है मै कैसा हूँ ॥
सुबह होते किरणे फूटेगी ॥
सारी अकड़ छुड़ायेंगे ॥
हर बार तुम्हारा रसपान करेंगे ॥
हम भवरे बन कर के आयेगे ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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