गगन मगन हो नाचा

जब बहने लगी हवाए ॥
गगन मगन हो नाचा ॥
बसंत ऋतू के मौसम में ॥
बजने लगा था बाजा ॥
मै तुम्हे पुकारू आ जा ॥
तू मुझे पुकारे आ जा ॥

कोयल की कू-कू बोली ॥
मन को हरषाती है ॥
भवरे गाना गाते ॥
कलिया मुस्काती है ॥
मस्त मगन हो मन ॥
प्रीतम के पास है भागा ॥
मै तुम्हे पुकारू आ जा ॥
तू मुझे पुकारे आ जा ॥

महक रही है कलिया ॥
लहराती है डाली ॥
मै बन के दीवानी तेरी ॥
गाती हूँ कव्वाली ॥
अब अमृत की बूँद पिलाओ ॥
क्यों दूर खड़े हो राजा ॥
मै तुम्हे पुकारू आ जा ॥
तू मुझे पुकारे आ जा ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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