तेरे लिए सनम

नीलम हुआ था मै भी ॥
तेरे लिए सनम ॥
बदनाम हुआ था मै भी ॥
तेरे लिए सनम ॥
खुशिया ले कर आता था ॥
आँचल में तुम्हारे भरता था ॥
मै हर पल साथ तुम्हारा ॥
हंस हंस कर देता था ॥
मै हरिद्वार से कँगन लाया ॥
सिर्फ तेरे लिए सनम ॥
खुला हुए लव लेटर को ॥
खूनो से सजाया था ।।
अपने दिल के अंदर ॥
तेरी सुरति को छिपाया था ॥
मै बना भी आशिक तो ॥
सिर्फ तेरे लिए सनम ॥
मै ऋतुओ को बोला ॥
तेरे आँगन में बरसे ॥
मेरे सनम का मन ॥
मेरे लिए तो हरषे ॥
मै मंगल सूत्र भी लाया ॥
सिर्फ तेरे लिए सनम ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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