केजरीवाल चालीसा

दोहा : सच्चायी की अलख जगाया जनता दे दिया साथ ॥
विजय पताका हासिल कर ली खा गये सारे मात ॥

चौ: जय केजरी कुंवर बलवंता ॥ मनीष संजय संग भगवंता ॥
सच की टोपी सिर पर सोहे ॥ मृदु वचन से जनता मोहे ॥
पूर्ण वादे को करने वाले ॥ लोगो का दुःख रहने वाले ॥
भ्रष्टाचार को करो उजागर ॥ अत्याचारी की फोड़ो गागर ॥
नीति विरोध काम नहीं करते ॥ जन जन की पीड़ा तुम हरते ॥
लोकपाल जल्दी ले आओ ॥ सच की दिल्ली जल्द बनाओ ॥
चारो तरफ हुआ नाम तुम्हारा ॥ भ्रष्टाचार को तुमने मारा ॥
सब गरीब अब सुख पायेगे ॥ उनके दुःख अब दूर जायेगे ॥
बेरोजगार को मिले नौकरी ॥ सच्चायी संग ले करे चाकरी ॥
जन जन के तुम हो रखवाले ॥ सबके प्यारे अलग निराले ॥
साधारण खुद ही रहने वाले ॥ कभी गलत न करने वाले ॥
जय जय हे दिल्ली के दाता ॥ तुम्हरी रक्षा करे विधाता ॥

दोहा :-आम पार्टी रुके कभी न करती रहे उत्थान ॥
लालच अहंक कभी न आये डिगे नहीं ईमान ॥

आम पार्टी जिन्दाबाद ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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