आशिको पर हंसा गुलाब

आशिको आशिकी को देख ॥
गुलाब हंस रहा है ॥
आशिको की अय्याशी पर ॥
तंस कस रहा है ॥
प्रेम की मिशाल ॥
कांटो से कर रहा ॥
गम का दौर आशिको ॥
का अब चल रहा ॥
वेवफा खड़ा सड़क पर ॥
कुछ मल रहा है ॥
आशिको की अय्याशी पर ॥
तंस कस रहा है ॥
अब सज धज के अप्सराये ॥
मोती लुटायेगी ॥
आशिको की बाहो में ॥
राते बितायेगी ॥
यौवन उथल पुथल कर ॥
कुछ रच रहा है ॥
आशिको की अय्याशी पर ॥
तंस कस रहा है ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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