आसमान से रिश्ता बादलों का

आसमान से रिश्ता
बादलों का
जैसे आंच पे उबलते जल से रिश्ता
वाष्प का
उड़ जाता है
हाथ न आता है
लुप्त हो जाता है
एक सफर से होकर
गुजरता है
बस एक अहसास सा
दिल में उतर जाता है
आसमान फिर अपने
आसमानी रंग में नहाया
अकेला रह जाता है
मेरे घर की खिड़की से दिखता
एक बादल का टुकड़ा तो
मेरे घर की छत पे बरस
जाता है
लेकिन बिना बादलों का
नीला आसमान
फिर एक आंचल सा
खुद लहराता
खुद संभलता
संभालता
ठहरा सा
तन्हा
वहीं का वहीं
अपने यथास्थान पर
खड़ा रह जाता है।

मीनल

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