एक काली परछाई मैं

आसमान में
रंग हैं कितने
गिन रही मैं
दुपट्टा हवा में लहराऊं
नीले रंग से रंग दूं
काले बादल के टुकड़े
फूलों के प्रिंट से
काले छापों से
उसपे टांक दूं
खुद भी बन जाऊं
एक काली परछाई मैं
एक आसमान और
उसमें बिखरे रंग समेटने हैं
तलाशना है
एक आसमान
उसमें फैले रंग
मुझ जमीन को
अपने अंदर
अपने भीतर।

मीनल

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