हर बार दगा देती है

देती है मुहब्बत की ||
दुहाई ओ बार-बार ||
हर बार दगा देती है ||
हरजाई ओ बार-बार ||

आँखों का चला के जादू ||
उत्तेजित मुझे किया है ||
यौवन की खुश्बू फेंक कर ||
प्रेरित मुझे किया है ||
मिलने का वादा करके ||
आती न बार-बार ||
हर बार दगा देती है ||
हरजाई ओ बार-बार ||

तन्हाइयो में राते ||
मैंने भी गुजारा है ||
फोन पर उसे तो ||
मैंने भी पुचकारा है ||
ओ बेदर्द दिल की रानी ||
मुस्काती है बार-बार ||
हर बार दगा देती है ||
हरजाई ओ बार-बार ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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