बुलाया न कीजिये

खुश्बू अपने हुस्न की ॥
उड़ाया न कीजिये ॥
आँखों से मुझपे जादू ॥
चलाया न कीजिये ॥
अनजान मुसाफिर को ॥
भरमाया न कीजिये ॥
सपनो में आके जानम ॥
जगाया न कीजिये ॥
यौवन की आग को तुम ॥
उस्काया न कीजिये ॥
दरिया किनारे नाम ले ॥
बुलाया न कीजिये ॥
अकेले में देख मुझको ॥
मुस्कुराया न कीजिये ॥
बार बार घण्टी मेरी ॥
बजाया न कीजिये ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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