दिल की दास्तान

ऐ चांद
सुनो
मेरे दिल की दास्तान
मैं काली रात की एक
परछाई हूं
उतर आओ आज मेरे
आसमान
मैं जमीं की गोद में
खिलती
एक कली हूं
ओढ़ा दो मुझे
सितारों से भरा
एक जहां
दिल में चुभते
नासूर कुछ तो कम कर दो
खिलते फूलों में कुछ तो
मोहब्बत के रंग
भर दो
तन्हा तुम हो
तन्हा मैं भी
आ जाओ
मेरे घर आंगन
होकर चांद की डोली में सवार
समा जाओ
मेरे आगोश में
आंखों में आंखें
डालकर
कर लो बतिया चार।

मीनल

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