मेरा मन

मन में उमंग है
जल में तरंग है
आसमान में बादल है
दिल मेरा पागल है
बरस जाऊं आज मैं
घटा घनघोर सी
जीने की ललक है
भाव भंगिमाएं चपल हैं
एक बालक सा हिलोर लेता तन है
आसमान से जमीन को मिलाने का
प्रयत्न है
पानी में मछली सी
तैरुं
भंवरों में नैय्या सी डोलूं
नदी हो या समुंदर
इसकी गहराई छू लूं
आगे इसके पार क्या है
यह जानने का आज
मेरा मन है।

मीनल

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