जीवन का गणित

जीवन का गणित

मैं बच्ची हूं तो
क्या हुआ
अबोध हूं तो
क्या हुआ
मुझे भी घर के
इस दुनिया के
इस जीवन से जुड़े
सारे काम सिखाओ
आज कोई मेरी नहीं
मैं सबकी तस्वीर खींचूंगी
कैमरे से फोटो करते हैं
कैसे क्लिक
यह मुझे सिखाओ
मेरे कमरे में बिखरे पड़े हैं
खिलौने
अस्त व्यस्त
मैं इन्हें अपने आप ही
व्यवस्थित कर लूंगी
सीख लिया है हर काम
मैंने भी अब तो
थोड़ा थोड़ा
फूलदान में फूल
कैसे सजाने हैं
एक पुराने पड़े ग्रामोफोन से
गाने कैसे बजाने हैं
कमरे की खिड़की कैसे
खोलनी है
बिस्तर पे पड़ी चादर की
सलवटें कैसे
हटानी हैं
मेरे पापा के माथे पे
पसीना आये तो
इसे रुमाल से कैसे पोंछना है
मम्मी की आंख में आंसू आये
तो उसे कैसे सुखाना है
मुझे अपने भाई बहिन से
कैसे खेलना
कितना बोलना
कितना उन्हें सम्भालना है
पड़ोस के बच्चों से
स्कूल के सहपाठियों से
पार्क में मिले दोस्तों से
कितना और कैसे
सामंजस्य बिठाना है
यह गणित मुझे समझ
आ गया
स्कूल में नहीं पढ़ा
पर कुदरती जब इस दुनिया में
जन्म लिया तो
जब से होश संभाला
जीना आ गया
मम्मी, पापा, भैय्या, दीदी
और मेरे दोस्तों
कोई मेरी चिन्ता मत करना
मैं दिखने में छोटी हूं
पर दिल मेरा बड़ा है
समझ मेरी विशाल है
दायरा मेरा विस्तृत है
प्यार की छाया देता
मेरा पेड़ घना है
मैं कोई बच्ची नहीं
मेरे दिल के घोंसले में पलता
चिड़िया का बच्चा
वयस्क है
बड़ा है
मैं अभी उड़ न सकी या
आकाश में ऊंची उड़ान भर न सकी
तो न सही
पेड़ की डाल से गिरूंगी नहीं
बिना सहारे
पेड़ की डाल को मजबूती से
पकड़कर बैठने का
अकेली में हौसला
बड़ा है।

मीनल

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