दिया गम किसी को किसी को हंसाया

दिया गम किसी को किसी को हंसाया

दोहा :- गरीबो का जग में गुजारा नहीं है ।
प्रभु के बिना कुछ सहारा नहीं है ॥

दुनिया में भगवन ने सब कुछ बनाया ।
पर दिया गम किसी को किसी हंसाया ॥ २
एक औरत की सुनो दास्ता सच्ची कहता ।
पति जिन्दा रहा बिमार वह हरदम रहता ॥
पति के बिमारी में वह धन और दौलत बेंची ।
सारा जेवर सुनो सम्मान मलकियत बेंची ॥
एक दिन रात में पति ने कहा बुला करके ॥
ठंडा पानी तो लाओ कही से अब जाकरके ॥
नारी पानी को गयी पति ने दम तोड़ दिया ॥
आज दुनिया से सुनो नाता बाबा छोड़ दिया ॥
पत्नी जब आयी जीवित पति नहीं पाया है ॥
रो रो कर आवाज तभी प्रभु को सुनाया है ॥
किसके गले से भगवन हमको लगाया ॥
पर दिया गम किसी को किसी हंसाया ॥ २
अकेली लाश लिए पति को जलाने चल दी ॥
धधकती ज्वाला अपने दिल की बुझाने चल दी ॥
पहुंची जब घाट पर चिता ज्यो रचाती है ॥
अपने हाथो से स्वम पति को जलाती है ॥
शाम का वक्त चिता लगी थी भाभकने ॥
एक साधू आया फिर लगा वही तड़पने ॥
साधू बाबा ने कहा सुनो घाट मेरा है ॥
लाश हटा ले फ़ौरन हमारा डेरा है ॥
किसके कहने से चिता यहाँ तू रचाई है ॥
सुनो नारी फिर यही रोकरके सुनाई है
पति के सत पे यहाँ चिता को रचाया है ॥
पर दिया गम किसी को किसी हंसाया ॥ २
नारी रोकरके कहा लाश न उठाऊगी ॥
बिना जलाये हुए पति को नहीं जाऊगी ॥
साधू बाबा ने कहा जल को बढ़ा दूंगा तब ॥
नारी रोकरके कहा हाथो पे लजा लूंगी जब ॥
साधू बाबा ने सुनो जल को जब बढ़ाया है ॥
जलती हुयी लाश नारी हाथ से उठाया है ॥
पति को अपने नारी मुस्कुराते हुए पाया ॥
कहते कैलाशी ये सब भगवन की माया ॥
पर दिया गम किसी को किसी हंसाया ॥ २

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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