दिन रात रो रही हूँ

दामन के दाग को ॥
आंसूओ से धो रही हूँ ॥
कोसती हूँ उसको ॥
दिन रात रो रही हूँ ॥

लोक लाज का डर पर ॥
कोख की विशेषतायें ॥
आगे जब देखती हूँ ॥
अन्धकार ही दिखाये ॥
लोगो के ताने सुन सुन ॥
दिन रात खो रही हूँ ॥

उसका अता पता नहीं ॥
रहा न ठिकाना ॥
सोचती हूँ आगे क्या
कहेगा ज़माना ॥
ख्वाबो को अपने गम संग ॥
पल पल जोह रही हूँ ॥

चिंता से घटी शरीर है ॥
सूख गयी है काया ॥
समझ सकी न कुदरत ॥
कैसी तुम्हारी माया ॥
बुझने न पाये दीप मेरा ॥
बला को रोक रही हूँ ॥
कोसती हूँ उसको ॥
दिन रात रो रही हूँ ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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