पहला प्यार

मेरे जीवन की कहानी भी किसी से उम्र भर में हुई एक मुलाकात की तरह ही छोटी सी है।
एक छोटे से गांव में नदिया के पार झरनों के सहारे सरसों के खेतों से लगा मेरा छोटा सा घर संसार है।
एक मुसाफिर भूला भटका परदेस से मेरे गांव नाव में बैठकर आया तो नदी के किनारे नाव के लगते और उससे उतरते उसके जूते भीग गये।
उससे आंखें क्या चार हुई मैं तो एक फिल्मी पर्दे पे चलती प्रेम कहानी की तरह ही पहली नजर में दिल हार बैठी। प्रेम की अग्न दोनों के दिलों में बराबर की लगी थी।
वो मेरे गांव एक हवा के झोंके की तरह आया और बहुत सारे मुझसे वादे करके वापिस चला भी गया।
सरसों के खेत में टहलती अक्सर मैं सोचती हूं कि उसका पल पल इंतजार करना, उसकी यादों में खोये रहना, उस अजनबी के लिए मन में इतनी बेचैनी, दिन हो या रात उसकी बातें मन करे हरदम याद। यह सब प्रेम है क्या? क्या मुझे किसी से पहला प्यार हो गया है? क्या वो कभी लौटकर मुझे अपनाने वापिस आयेगा? क्या उसका हाल भी मेरे जैसा ही होगा? क्या वो मुझे याद करता होगा? क्या एक अनिश्तित्ता की आंधी में वो इस पतझड़ के बाद बहार बन मेरी जिन्दगी में लौट मुझे सावन के सतरंगी झूले में झुलायेगा।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

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