वफ़ादार गुलाम

वफ़ादार गुलाम

By |2018-01-20T17:08:56+00:00March 29th, 2016|Categories: बाल कथाएँ|Tags: |0 Comments

बात उन दिनों की है जब अमरीका में दास प्रथा थी| इस प्रथा में गरीब लोगों को जानवरों की भाँती बेचा जाता था | अमीर लोग उन्हें खरीदकर ‘गुलाम ‘ के रूप में अपने पास रखते थे| एस ही एक गुलाम था, बेंकर | बेंकर मन लगाकर अपने मालिक की सेवा किया करता था | इससे उसका मालिक उससे प्रसन्न रहता था |
एक बार बेंकर का मालिक उस स्थान पर गया जहाँ गुलामों की बिक्री हो रही थी| वह बेंकर को भी साथ ले गया था | वहां बेंकर ने मालिक से एक बूढ़े गुलाम को खरीद लेने का आग्रह किया| मालिक बेंकर को बहुत मानता था इसलिए उसने बेंकर की बात नहीं टाली और उस बूढ़े गुलाम को खरीद लिया |
घर आकर बेंकर ने बूढ़े गुलाम की खूबसेवा की, उसे नहलाया -धुलाया और अच्छे कपड़े पहनने को दिए| फिर उसे भरपेट भोजन कराया | बेंकर का मालिक यह सब देखकर अचंभित था| उसने आखिरकार बेंकर से पूछ ही लिया , ” बेंकर ! क्या तुम्हारा सागा- सम्बन्धी है?”
“नहीं मालिक! यह मेरा सागा-सम्बन्धी नहीं है| यह आपकी तरह ही दौलतमंद इंसान था जिसने मुझे तब गुलाम के रूप में खरीदा था जब मेरी आयु मात्र बारह वर्ष की थी| इसकी अपनी कोई संतान नहीं थी | इसने मुझे बेटे की तरह पला था | मैंने इसे देखते ही पहचान लिया था|”
बेंकर का मालिक प्रभावित हुए बिना रह न सका| उसने उन दोनों को आज़ाद कर दिया| इतना ही नहीं , उसने उन्हें ढेर सारी रकम देकर नई जिन्दगी शुरू करने की सलाह दी |

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