धरणी को चमकाती हूँ

मै सूरज की वही हूँ किरणे ||
जो धरणी को चमकाती हूँ।।
सोना चांदी हीरे मोती ||
धरती में उपजाती हूँ।।

फूलो से महक बिखराती हूँ।।
चिडियों से गीत सुनाती हूँ ||
मै नदियों की चंचल धारा हूँ ||
जो कल कल कर लहराती हूँ।।

हर मौसम में प्रकृति धरा को।।
अपने हाथो से सजाती हूँ।।
सोये हुये अंकुर के अन्दर।
बीज की ज्योति जलाती हूँ।।
मै सूरज की वही हूँ किरणे ..
जो धरती को चमन बनाती हूँ।।
मै सूरज की वही हूँ किरणे ||
जो धरणी को चमकाती हूँ।।

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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