बुलाती है सेज पर

जब कलम कांपी लेके ॥
बैठता हूँ मेज पर ॥
आँखों से इशारा करके ॥
बुलाती है सेज पर ॥
फिर भी दिमाग को मै ॥
भंग नहीं होने देता ॥
शब्दो को सजा के एक ॥
कविता लिख लेता ॥
सुबह सुबह जब नींद खुलती ॥
भाग जाता हूँ खेत पर ॥

ताज्जुब पत्नी करने लगी ॥
तहकीकात शुरू किया है ।।
मै भी अपनी जुबान पर ॥
अब ताला लगा लिया है ॥
लिखूगा रोज कविता ॥
बैठ कर उस मेज पर ॥
आँखों से इशारा करके ॥
बुलाती है सेज पर ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

No votes yet.
Please wait...

शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

Leave a Reply

Close Menu