महिला दिवस

महिला दिवस

नारी सशक्तिकरण पर भाषण देने वालों ,
ज़रा इन सवालों के जवाब तो दो ।

उच्च वर्ग की महिलाओं को छोड़कर ,
नामी फिल्म अभिनेत्रियों को छोड़कर ,

टाटा ,बिरला और अंबानी सरीखी धनिकों की
महिलाओं को छोड़कर ,

कौन सी महिला को आर्थिक स्वतन्त्रता मिल गयी है ?
क्या समानता का अधिकार मिला है ?

क्या विचार -अभिव्यक्ति का अधिकार मिला है ?
क्या स्वेच्छा से कभी भी कहीं भी विचरण करने का
अधिकार मिला है ?

क्या अपने जीवन को अपने ढंग से चलाने का
अधिकार मिला है ?

क्या उनके प्रति घरेलू हिंसा बंद हो गयी है ?
क्या बाल -विवाह ,बेमेल विवाह , कन्या भ्रूण हत्या

बंद हो गयी है ?
क्या सामाजिक न्याय मिलने लगा है ?

क्या समाज के इंसानी भेड़ियों खत्म हो  गए है ?
अपनी अंतरात्मा में झांक कर जवाब देना ।

यदि पूछोगे तो यही आवाज़ आएगी !
नहीं ! नहीं! नहीं!

तो पहले इन सब सवालों को  जवाब ढूंढो ,
इनका हल निकालो ,

फिर करो नारी सशक्तिकरण की बातें ,
अपने लंबे -लंबे उबायु भाषणों में,

देश की हर नारी (बेटी ,बहन ,माँ और बच्ची )
जब पूर्णत : सुरक्षित ,स्वतंत्र ,सम्मानित और सुखी होगी ,

तभी महिला दिवस मनाना सार्थक होगा ,
अन्यथा कैसा महिला दिवस !!

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ओनिका सेतिया 'अनु'

संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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