चिंगारी का उत्सव

चिंगारी का भी
रंग होता है
जला देता है खुद को
दूसरों को भी
चिंगारी का भी
उत्सव होता है
मनाता है अकेले में
लोगों के संग भी
चिंगारी का धर्म होता है
तन खुद का फूंकता है
मन गैरों का अपनेपन से
भरता है
चिंगारी का भी एक निश्चित समय सीमा में तय जीवन होता है
बुझा देता है खुद को
रुला देता है औरों को भी।

मीनल

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