बदलते रंग

रंग ही रंग
बिखरे हुए
मेरे चारों तरफ
कैसे पहचानूं
अपनों के चेहरों के पल पल बदलते रंग
कैसे पाऊं उनका संग
जो मेरे तन का रंग छुड़ाकर
जा रहे दूर मुझसे
जीवन बनाकर मेरा बेरंग।

मीनल

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