हालत से पहिचान गये थे

मै छू के देखा दिल को उसके ॥
उसका दिल तो टूट चूका है ॥
प्यार में उसने धोखा खाया ॥
जीवन से वह ऊब चूका है ॥
हाल बताने में डरता है ॥
हालत से पहिचान गये थे ॥
गम के आँसू से भीगा है ॥
देख के मुखड़ा जान गये थे ॥
समय चक्र हँसता उसपर है ॥
मौसम उससे रूठ चुका है ॥
मै छू के देखा दिल को उसके ॥
उसका दिल तो टूट चूका है ॥
प्यार में उसने धोखा खाया ॥
जीवन से वह ऊब चूका है ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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