नागफनी सी जिन्दगी

नागफनी सी
जिन्दगी
कांटे चुभा रही
कांटों में भी
पर मेरी संयमित समझ
फूल उगा रही
जीवन में
फूलों को चुनना है या
कांटों को
यह कुछ हद तक किसी की
सोच पर भी निर्भर करता है
कांटों का बिछौना बिछा कर भी
जो फूलों के मधु का रसपान करे
कांटों में उलझ कर भी जो
फूलों से ही प्यार करे
कांटों से भरे उपवन का भी
जो न उपहास करे
कांटों को बिना नजरअंदाज करे
जो उसके सच को स्वीकार
किसी कीमत पे भी न उन्हें
नकारे
उनका जीवन तो फूलों की डगर
बने
उनका वास तो
फूलों का शहर बने
हर श्वास फूलों की ज्योत
जले
मन कलियों का मंदिर
दिल महकते फूलों की रेशमी डोर
बने।

मीनल

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu