कोरोना का रोना

कोरोना का रो के रोना ||
पास नहीं ओ आती है ||
कही वायरस घुस न जाये ||
इसी लिए घबड़ाती है ||

दो मीटर की बना के दूरी ||
न जाने क्यूँ रहती है ||
नजदीक हमारे तुम मत आना ||
ऐसी बाते कहती है ||
ये महाविमारी जब से आयी ||
तब से ओ थर्राती है ||
कही वायरस घुस न जाये ||
इसी लिए घबड़ाती है ||

दूर से खाना पानी देती ||
दूर से करती बात ||
जब कहता इधर तो आओ ||
हो जाती नाराज ||
कैसे इतना बदल गयी ओ ||
इतना क्यूँ चिल्लाती है ||
कही वायरस घुस न जाये ||
इसी लिए घबड़ाती है ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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