सूरज का प्रभामंडल

सूरज के प्रभामंडल के
बन रहे न जाने कितने
अनगिनत प्रतिबिम्ब
उसकी जल में पड़ती
परछाइयां
बना रही प्रकाश की
मछलियों के तैरते
पदचिन्ह
सूरज जो डूब जाये
जल की तरंगों में जो
डुबकी लगायेगा
जल की लहरों संग ही जो
कहीं गहरे खो जायेगा
आकाश में अंधकार छा
जायेगा
जो दिख रही हैं छवियां
वो सब धूमिल हो जायेगा
एक युग तक
या एक उगती सुबह तक तो
यह नजारा
बिना दर्शक के नजर
नहीं आयेगा।

मीनल

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