“घर पर वास”

“घर पर वास”

आग लगी है बाहर वैश्विक संक्रमण की महमारी की
कुछ दिनों के लिए इस आग से दूर हो जाओ
आग स्वत: ही बूझ जायेगी ।

रुक जाओ थोड़ा ठहर जाओ
कुछ दिन घरों के अंदर कैद हो जाओ,
बाहर वैश्विक संक्रमण महामारी का राक्षस बैठा है
जिसको छूने से ही संक्रमण फैल जाता है

तोड़ दो कुछ दिनों के लिए समाजिक संपर्क
घरों में रहकर… लड़ना है एक महायुद्ध
अपने-अपने घरों में रहकर क्योंकि इस युद्ध के
क्रम को तोड़ना है ।

बाहर बैठा संक्रमण का शत्रु अकेले रहकर
समयावधि में स्वत:ही मर जाएगा

करोना का कहर
बन फैल रहा है जहर
थोड़ा ठहर ।

इधर-उधर मत भटको
हाथों को बार-बार धोओ
स्वच्छता पर विशेष ध्यान दो

थोड़ी दूरी बनाओ
समाजिक व्यवस्थाओं से
दे स्वयं को आराम ।

लगी है एक आग
वैश्विक संक्रमण महामरी की
इस आग की चिंगारी को संग अपने
ना ले जाना ,वरना तुम अकेले नहीं
समस्त मानवजाति खतरे में पड़
जायेगी तबाह हो जाएगी ।

बहुत निभाए समाजिक सम्पर्क हमने
अब समय मिला है, किसी बहाने से ही सही
परिवार के संग परिवार को
समझने का खुशियां बांटने का उन्हें जीने का ।

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