इल्तिजा

दुश्मनी छोड़ो
दोस्ती का हाथ बढ़ाओ
इस दुनिया से रुखसत हों
उससे पहले
जीवन की डगर पे
तम्मनाओं के सफर पे
चलो
हरे भरे खेत की पगडंडियों पे
चलकर
सुबह की ताजी हवाओं के
शीतल झोंकों
चंदन सी सुगंधित दिशाओं में
बहकर
नदी किनारे
कुछ दूर टहल आयें
रंजिशें भुलाकर
चुपचाप चलें
कुछ न बोलें
बस पदचापों की
आवाज सुनें
खामोशी से अपने अपने घर वापिस
लौट आयें
अगली सुबह भी सैर करने,
टहलने
एक साथ निकलें
बस यही इल्तिजा करें।

मीनल

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