सही सलामत

बारिश के मौसम
जरा सुनो
करवट बदल लो
और आसमान में
उजाला भरो
कोई भी चीज
कितनी भी खूबसूरत
क्यों न हो
एक हद से गुजर जाये तो
अच्छी नहीं लगती
कहर बरपा देती है
घुटन उपजा देती है
मैं सड़क पे खड़ा हूं
छाता ताने
पैर फिसलने का डर है
चल रहा हूं हौले हौले
हवाओं के थपेड़ों के
खिलाफ
खुद को थामे
ऐ आसमान
अब थम जाओ
गमगीन थे
बहुत रो लिये
अब खिलकर कली से
मुस्कुराओ
आसमान को धो डाला है
अब उसमें सूरज की तपिश की
कुछ गर्माहट तो फैलाओ
मैं बीच रास्ते न फंसा रहूं
मेरे हृदय में प्रकाश भर
दो
काली घटाओं
अंधकार मिटाओ
मुझे मेरे घर
सही सलामत वापिस
पहुंचाओ।

मीनल

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