ग़ज़ल

मोहब्बत का जादू सर चढ़कर बोले
शाम को उनकी याद सताई मुझकों

दिल के अंदर बेचैनी है मगर खुश है
गम की गहराइयों से घिरे हुए पाया

मैं हाल-ए-बेहाल हो जाता हूं
जब तेरी जिक्र हो जाती है

तेरी तस्वीर अक्सर छुप के देखता हूं
रातों में अक्सर आहें भरता हूं

जबसे उससे बिछड़े तबसे चैन नही मिला
वों किसी और के साथ सुकून से रहती है

सुन्ना है शौहर के साथ खुश है
मैं क्यों उनकी यादों खोया हूं

इश्क़ में उसे मरहम मिल गया
मगर मैं आसुंओं में खोया हूं

दिल्लगी है उनसे जज़्बात है हमसे
सुना है तन्हाई में मुझे याद करती है
प्रेम प्रकाश २०.०४.२०२०

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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