ग़ज़ल

हर एक के जीवन में गम है
हर शख्स यहां तन्हा है दोस्त

कौन कहता है मैं शराब नही पीता
हर एक को नशा की लत लग गई

छुप कर देखा तालीम अपना अपनों का
सब ख़ुद की सच्चाई से कोसों दूर क्यों है

बदनाम तो शाराब को लोग करते हैं
मगर ख़ुद की आबरू सब बचाने में हैं

बेग़ैरत इस दुनियां में अकेला है हर इंसां
प्रेम मजबूर है लतीफ़ लिखने और लिखतें
प्रेम प्रकाश

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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