सीधा साधा लड़का…

मैं ठहरा सीधा साधा लड़का
उसे पसन्द था जंगली जवानी
करम का खेल है ऐसा सुनते है
भईया जो भी है मेरी है लुगाई।

अब सातों फेरों की इज्जत रखेंगे
हम है झारखंडी वचन दिए तो दिए
मैं उसके लिए चंबल के डाकू भी बनें
अब उसके लिए मोगली के जानवर है

का करें हमलोग जो अधेड़ के उम्र शादी करते हैं
सौभाविक है सीधे तो होंगे नही उम्र के लिहाज है
उसकी ख़ातिर जंगली जवानी और cating ही सही
भईया ऐसा है सीधे लड़के है जैसे चाहे वैसे बन जाएं

ढोलक और उसके गाने बाजने के साथ विवाह लाएं है
उसके हर एक इक्षा को पूरी करनी हमारी ज़िमेदारी है
पूरी दुनियां छोड़कर…एक अनजाने के साथ आ गई है
मैं तो उसका पूरा ख्याल रखूंगा भईया….मैं हूँ सीधा लड़का!

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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