सदमा

सदमा

घर का दरवाजा
बंद है
दरवाजे पर ताला भी
पड़ा है
कहां गया इस घर में
रहने वाला वो
फकीर
वो देवता
वो मेरी किस्मत की रूहानी
लकीर कि
उसके चले जाने से
मेरी दुनिया वीरान हो
गई
मेरे कदम इस घर में
पड़ते नहीं कि
मेरे दिल की बगिया
खाली
मेरी आवाज खामोश और
मेरी चहकती कलियों की लचक
सुनसान हो गई
बहारें आईं पर
कोयल एक साये सी
घूमती दिखी
इस बियावान जंगल में
पर फिर कभी
कूक न पाई
हर रास्ता मुड़ा
इस घर के बंद दरवाजे की
तरफ
पर मंजिलों की सिमटी
दीवार इस
मजार की कगार को
तोड़ न पाई
यह जुर्म कर न पाई
इस दुनिया से किसी
प्रियजन की रुखसती का
सदमा बर्दाश्त कर न
पाई।

मीनल

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This Post Has 2 Comments

  1. Saurabh Salil

    Heart touching. Maarmik vyatha.Tears roll on my cheeks.

    Rating: 2.0/5. From 1 vote. Show votes.
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  2. Minal Aggarwal

    फिर तो मेरी कविता सार्थक हुई।
    धन्यवाद।

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