🍂🍂मेरी शोहबत बिगाड़🍂🍂

🍂🍂 ग़ज़ल🍂🍂

मेरी शोहबत बिगाड़ देती
उनकी एक झलक पाके!

नज़ारे देखती हैं आंखें*
सहना दिल को सहना!

ज़िंदगी भर उनका दीदार किया*
बिना दिहाड़ी का मजदूर हूं मैं!

अरमान बहुत था “प्रेम”
सारा कसूर इश्क़ का था!
प्रेम प्रकाश…२५.०४.२०२०

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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