इश्क़ का फरमान

ग़ज़ल

इश्क़ का फरमान लाया
दुवाओं का मौसम आया

पहलों में बैठा हूं आजकल
बिना दिहाड़ी का मजदूर हूं

ज़बान से बरकत दिया बहुत
सोचकर उसे मिलोगे कैसे…

ज़िंदगी कैसे बसर होंगी
मन घबराता है कभी कभी

ईबादत का महीना आया
प्रेम के बिना जाएं तो कहां
प्रेम प्रकाश २६.०४.२०२०

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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