हरि का संसार

हरा रंग देखकर
हरि के दर्शन हो जायें
हरे पत्तों के पीछे छिपी
कोयल सा मन
हरि स्मरण में
हरि नाम लेकर
हरि गुण गाये
हरि के भजन गाये
यह प्रकृति प्रभु की बनाई हुई
एक धार्मिक स्थल ही है
एक मंदिर ही है
एक हरि का दर्पण ही है
हरि दर्शन के लिए
ऐ मानस
तू बन बन क्यों भटके
मन में ज्योत जला
पग में फूल खिला
नयनों में दर्पण लगा
हाथों में तर्पण की मुद्रा
सजा
गले में चंदन की माला
पहन
कमर पे सच्चे मोतियों से मन का अंग
लिपटा
हर किसी को हृदय से लगा
मन में बसा
मंदिर की दीवार पे सजा
जहां नजर दौड़ा
वहां हरि का चित्र पा
जहां चित्र पा
वहां हरि का संसार पा।

मीनल

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