तुमें हमने चाहा कुरान की तरह

ग़ज़ल

तुम्हें हमनें चाहा कुरान की तरह!
तुनें जीवन से निकाला दूध से छाली की तरह!!

वक़्त बेवफ़ा हो गया मजनूं की तरह!
शाहजहां ने ताजमहल बनवा दिया मुमताज़ की तरह!!

कसमें खाई थी इश्क़ में वर्णा!
हम भी अटल बिहारी बन जाते इस तरह!!

मोहब्बत में रुसवाई हो लाज़मी था!
वर्णा तुम प्रेम की आगोश में रहती इस तरह!!
प्रेम प्रकाश २८.०४.२०२०

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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