कहां मेरी फिक्र उन्हें

ग़ज़ल
उनको मेरी फिक्र कहाँ रहती
उनके आगोश का आसरा था!

एक आसरा था उनके आने का!
चलो अच्छा हुआ बहम खत्म हुआ!!

दृढ़ विश्वास किया था इस दिल ने!
अच्छा हुआ जो इश्क़ से परे यहां!!

चलो अच्छा हुआ वो ग़ैरों के दरम्यां चली गई!
हम बैठें थे बेवज़ह उनके इंतजार में बेख़ुदी से!!
प्रेम प्रकाश २९.०४.२०२०

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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