एक पतंग थी

एक पतंग थी

इरफान खान को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

एक पतंग थी
जो एक रंगबिरंगी शहर
जयपुर के मकान की एक
छत से उड़ी
और आसमान में मुकाम दर
मुकाम तय करती
मंजिल दर मंजिल पार करती
आंखों से ओझल हो गई
जमीं पे कहीं कटकर भी न
गिरी
आसमान के पार किसी दुनिया में
मिली तो
अपनी मां से जाकर मिली
जमीं उसके जाने से खाली हो गई
पर मां की गोद बेटे के
प्यार से
दुलार से
मां बेटे के रिश्ते के अधिकार से
गदगद
भर गई।

मीनल

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