प्रेम रोगी

प्रेम रोगी

ऋषि कपूर को अश्रुपूर्ण नेत्रों से भावभीनी श्रद्धांजलि

प्रेम नगर की
प्रेम गली के
प्रेम महल के
प्रेम मन्दिर के
प्रेम कुटीर में
प्रेम रोग से ग्रसित
एक प्रेमी
जो प्रेम न्यौछावर करता था
सब पे
प्रेम की गंगा लुटाता था
सब पे
प्रेम के फूल अर्पण करता था
सबको
प्रेम से हृदय लगाता था
सबको
आज वो अपने प्रेम के अथाह सागर के
पदचिन्ह छोड़कर
प्रेम की यादों में भिगोकर
सबको
चला गया
निकल पड़ा
एक अनदेखी
अनसुनी
अनकही
अनछुई
अनसुलझी
अनचाही
अंजान दिशा की तरफ जाती
एक अनजानी
प्रेम की यात्रा पे
प्रेम की राह पे
प्रेम की चाह में
प्रेम के मोती बरसायेगा
वो वहां से भी
प्रेम से सराबोर करेगा
सबको
नहलायेगा
दिल बहलायेगा
एक बात सदैव स्मरण
रहे
किसी भी प्रेम कहानी का
अंत हो सकता है
पर प्रेम का नहीं।

मीनल

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