कोरोना के चक्कर में

उसने कहा क्या हुआ आपको
आपका मूड गड़बड़ लग रहा है

उसने कहा क्या हुआ आपको
हमनें कहा कुछ नही क्या होगा मुझे

उसने कहा क्या हुआ आपको
हमनें कहा कुछ नही बातों को टाल दिया

उसने कहा क्या हुआ आपको
मैं अच्छा नही है हूँ कोरोना के चक्कर में

उसने कहा क्या हुआ आपको
घर मे न राशन है न हाथ में पैसा

उसने कहा क्या हुआ आपको
न मेरे पास नौकरी है न किराए देने का पैसा

उसने कहा क्या हुआ आपको
न कोई उपाएं है न कोई साधन

उसने कहा क्या हुआ आपको
मैंने कहा कुछ नही अच्छा है सब
प्रेम प्रकाश ०२.०५.२०२०

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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