पतझड़

वसन्त में भी पतझड़ है तुम्हारे साथ के बिना|
चाँदनी रात भी अमावस है प्रभात के बिना|
तुम्हारे बिछोह में जिन्दगी सूनी है ऐसे,
जैसे सूनी हो सावन बरसात के बिना|

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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