तस्वीर नहीं बन पा रही

तस्वीर नहीं बन पा रही

तस्वीर नहीं बन पा रही
बेशक हाथों पे रंग
लग गये हैं
मन के दर्पण में जड़ी
तस्वीर को
ड्राइंग शीट पे उतारना
मुश्किल प्रतीत हो रहा है
मन के भाव सच्चे हैं और
यह दुनिया में बिखरे रंगों
के धागे कच्चे
मन की दुनिया की
विशालता का यह
दुनिया का अनुभव एक
अंश भी नहीं है
एक बिंदु भी नहीं है
दोनों के दिल कहीं से
नहीं मिलते
दोनों के रंग आपस में
नहीं मिलते
एक कुदरती दूसरा
बनावटी
दोनों के प्रतिबिम्ब
एक ही दर्पण में
झांकने पर भी
एक दूसरे पे धूप और
छांव के साये की तरह पड़ने पर भी
एक दूसरे से कतई मेल
नहीं खा रहे।

मीनल

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