सपनों का दर्पण

सपनों का दर्पण

यह जल है
यह मेरे सपनों का दर्पण है
जिन चीजों को मैं छू नहीं
सकती
उन्हें पाने का साधन है
आसमान का चांद दूर है
मुझसे भी
और आसमान के सितारों से भी
जमीन पे रहते मैं
उसे हर रात
दूर से देख सकती हूं पर
पा नहीं सकती
आसमान से जमीन पे
बिछी जल की लहरों पे
जो उतरता है
मैं उसे छू सकती हूं
हिला सकती हूं
उसके हृदय की तरंगों का
साज
बजा सकती हूं
उसे गले से लगा सकती हूं
उसे अपना बना सकती हूं।

मीनल

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