Home delivery (कहानी)

Home delivery  (कहानी)

एक महिला ने
किराने वाले को
फोन लगाया।
बड़े विनम्र स्वर में
बतलाया –
हेल्लो, किराने वाले भैया,
मैने सुना है आप,
Home Delivery
करवा रहे हो।
किराने वाला बोला –
जी हां, बहिन जी बताइए,
क्या करूं सेवा।
हमारे यहां उपलब्ध है,
हर तरह की मेवा।।
महिला बोली –
नहीं नहीं भाई साब,
मेवे के लड्डू तो मै
बहुत खा चुकी हूं।
अब तो दर्द की लहर,
शुरु हो चुकी है।।
लगता है कुछ होने वाला है,
‘नया मेहमान’ आने वाला है।।
कृपा करके आप आ जाएं।
या टीम भिजवा दें ।।
इस कॉर्फ्यू में,
अस्पताल जाना तो झंझट
का काम है।
अच्छा होगा आप
घर पर ही
Delivery करवा दें।।
ऑर्डर सुनकर
किराने वाले को लगा
440 volt का झटका।
दुकान के बाहर जो,
बैनर था लटका।।
जिस पर लिखा था –
यहां होम डिलीवरी की जाती है।।
उसने उसको,
उचक- उचक कर,
फाड़ दिया।।
नया बैनर ,
शुद्ध हिंदी में लिख कर
टांग दिया।
यहां किराने की वस्तुएं,
“घर -घर पहुंचाई जाती” हैं।
Home delivery
बिल्कुल नहीं की जाती है।।
कृपया home delivery वाले,
मुझे परेशान न करें।
नर्सिंग होम या अस्पताल से
संपर्क करें।

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...
Voting is currently disabled, data maintenance in progress.

प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

Leave a Reply