पैरेंट्स डे

पैरेंट्स डे

आज पैरेंट्स डे है ना अरे वाह कितना अच्छा दिन है।
आज तो माँ बाबुजी के लिए एक मिठाई का पैकेट ले लेता हूं ।
ओर क्या लूं कपड़े भी ले लूं क्या ?
मनोज जी ने अपनी श्रीमतीजी से पूछा तो वो भड़क गई कपडे ही क्यों झूला ले लो ए. सी.  लेलो ओर भी बहुत कुछ है लेने के लिऐ महीने दो महीने का खाना पैक करवा लो उनके लिए ।
बस मेरे लिए कभी मत सोचना की एक दिन मेरे लिए भी आता है।
मनोज मिश्रा उदास हो बैठे अरे देवी इतना क्यों भड़कती है
करता तो हु सबके लिए ही ।
ठीक है तू कहती है तो नही लेता हूं।
इतना सुनते ही श्रीमतीजी फिर भड़क उठी
क्या कहा आपने की मैं मना कर रही हो घर मुझे ही दिखता है सिर्फ आपको तो कोई फर्क नही पड़ता ठीक है लेओ कपड़े अभी के अभी लेओ नही तो फीर कहते फिरोगे की कपड़े लेने से मेने मन किया था।
मनोज जी बड़ी दुविधा में थे सोचा ले ही लेता हूं
ओर एक कुर्ता पैजामा ओर एक साड़ी खरीद ली।
श्रीमतीजी का मुंह फुला देख एक साड़ी उनको भी दिलवा दी।
घर पहुँचते ही श्रीमतीजी को बोला तू चलेंगी क्या श्रीमतीजी ने ऐसी नजरों से देखा कि दोबारा नही पूछा ।
बड़े खुश हो रहे थे मनोज मिश्रा जैसे अपनी माँ और बाबुजी के लिए बहुत बड़ा उपहार ले जा रहे हो।
घर से निकले थे कि रास्ते मै शर्मा जी मिल गए मिश्रा की खुशी देखकर शर्मा जी पूछ बैठे
क्या बात है मनोज मिश्रा जी बड़े खुश हो रहे हो।
मिश्रा जी बोले
अरे होंगे क्यों नही आज इतना बड़ा दिन जो है।
अच्छा वेसे क्या है आज ऐसा
शर्मा जी की बात सुनकर मिश्रा जी उपहास वाली हँसी हंसकर बोले
वाह शर्मा जी वाह आज पैरेंट्स डे है और आपको पता तक नही
देखो मैं अपने माँ बाबुजी के लिए मिठाई और नए कपड़े ले जा रहा हूं
आप भी किसी की औलाद है आपका फर्ज बनता है कि नही आज के दिन उनकी देखभाल करने का पर आपको तो खुद के बीबी बच्चों से फुरसत कहा ।
खैर छोड़ो मुझे इन सब बातों से क्या ।
पर दुख की बात है कि आपको आज पेरेंट्स डे हैं इस बात की खबर तक नही ।
शर्मा जी मिश्रा की नादानी पर पहले तो हसे फिर बोले
वो क्या हैं ना मनोज मिश्रा की हमारे माँ और बाबूजी तुम्हारे माँ बाबूजी  की तरह वृद्धाश्रम मैं नही है वो घर पर है माँ को थोड़ी सर्दी हो गयी थी उसके लिए टेबलेट लेकर जा रहा हूं।
ओर क्षमा करना मिश्रा जी मुझे तो सचमुच नही पता था कि आज पेरेंट्स डे है और ये जो आज आप मना रहे है ना
ऐसा पेरेंट्स डे हमारे घर रोज ही मनता हैं।
इतना सुनते ही मनोज मिश्रा की सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी।
महेश शर्मा

No votes yet.
Please wait...
Voting is currently disabled, data maintenance in progress.

Leave a Reply