कुसंगति का फल
सेठ करोड़ीमल का रोहित इकलौता पुत्र था। उसका अधिकाँश समय अपने आमों के बागों में बीतता था। वहाँ उसके दो – चार दोस्त बन गए थे। उनकी संगति में रोहित बिगडने लगा। रोहित को उनके साथ रहकर नशे की लत लग गई। रोहित के लौटने पर उसके माता-पिता ने कहा बेटा नशा करना ठीक नहीं। यह तुम्हे बर्बाद कर देगा। परन्तु रोहित पर पिता की बात का कोई असर नहीं हुआ। अंत में उन्हें एक युक्ति सूझी। रविवार के दिन वे रोहित को लेकर आमो के बाग़ में पहुँचे। पेड़ों पर पके आम लटक रहे थे।

उन्होंने माली से आम तोड़ने को कहा। रोहित के पिता ने वे आम एक टोकरी में रख कर गेहूँ वाली टोकरी में रखवा दिए। उसकी आँख बचाकर सेठ करोड़ीमल एक दागी आम उठा लए थे। वे रोहित को देते हुए बोले बेटे इसे भी आमो की टोकरी में रख आओ। रोहित ने वैसा ही किया। दो दिन बाद रोहित ने टोकरी में जाकर देखा कि वे सुंदर पके आम सड़ चुके थे। रोहित ने अपने पिताजी से पूछा यह कैसे हो गया। पिताजी ने समझाया बेटा एक दागी आम ने इन सुन्दर आमों को भी अपना जैसा बना लिया। रोहित कि आँखे खुल गई और वह तब से सुधर गया।

सीख : हमें कभी भी कुसंगति का साथ नहीं करना चाहिए ।
– ओम कुमार

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