बुरी लगती है

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बुरी लगती है

By | 2018-01-20T17:06:16+00:00 October 17th, 2015|Categories: कविता|0 Comments

कागजी नावों पर बरसात बुरी लगती है
जहर तो जहर है फरियाद बुरी लगती है
कब्र के ऊपर ये जो घास अभी उग आयी
बीज देने वाले की याद बुरी लगती है
नूर बरसा तो कई दरख्त ख़ामख़ा रोये
चार चुपड़ी रोटी पर प्याज बुरी लगती है

लेखक – रश्मि दुबे

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