आशिक मिज़ाज कह कर न जाओ

आशिक मिज़ाज कह कर न जाओ

By | 2018-01-20T17:07:56+00:00 October 26th, 2015|Categories: कविता|0 Comments

आशिक मिज़ाज कह कर न जाओ
मुझ पर दोष न लगाओ

इसी आशिकी की तुम दीवानी थी
ये जुनून तुम को प्यारा था

प्यार करते हैं, दिल फेक नही हैं
आशिक मिज़ाज हैं, चरित्रहीन नही हैं

सब्ज़बाग नही दिखाने थे
दिल में अरमान नही जगाने थे

तुम तो दिखावे का प्यार करती थी
प्यार का झूठा दम भरती थी

हम से दूर जाने का बहाना न करो
आँखो में आँखे डाल कर, बस एक बार कहो….

अब प्यार नही करती हो, इज़हार करो
पर हमारे प्यार की तौहीन न करो….
लेखक – संजीव कुमार बर्मन

Comments

comments

No votes yet.
Please wait...
Spread the love
  • 3
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    3
    Shares

About the Author:

Leave A Comment